हिंदी कहानी — मौलिक काल्पनिक कहानी
कल से आया टिफिन
यह scroll के हिसाब से अंदाजा है, पढ़े हुए शब्दों की गिनती नहीं।

लैब की मशीन से पहली चीज टिफिन निकली। विक्रम ने ढक्कन खोला। अंदर दो रोटियाँ थीं, आलू की सब्जी थी और एक नोट था: आज बाहर मत खाना। पेट खराब हो जाएगा।
लिखावट उसकी अपनी थी। उसने मशीन की स्क्रीन देखी। भेजने की तारीख अगले दिन की थी। विक्रम ने पहली बार मशीन को छुआ नहीं। वह कुर्सी पर बैठ गया और काफी देर तक टिफिन देखता रहा।
तीन साल से वह चीजों को एक दिन पीछे भेजने की कोशिश कर रहा था। उसकी साथी इरा कहती थी कि पहले छोटा सा सिक्का भेजो। उसने भविष्य से सीधे खाना भेज दिया था। इरा हँसी। “कम से कम पता चला कि कल भी भूख लगेगी।”
मशीन में सीमा थी। डेढ़ किलो से ज्यादा वजन नहीं जा सकता था। चीज ठीक चौबीस घंटे पीछे पहुँचती थी। भेजने वाले और पाने वाले छल्ले उसी मेज पर रहने जरूरी थे। किसी आदमी के जाने की बात अभी दूर थी।
विक्रम ने नोट की बात मानी। कैंटीन नहीं गया। शाम तक लैब का काम पूरा किया। अगले दिन उसने वैसा ही टिफिन तैयार किया। पर नोट लिखते समय उसका हाथ रुक गया। उसका पेट तो खराब हुआ ही नहीं था। वह चेतावनी कहाँ से आई?
इरा ने कहा, “तुमने नोट पढ़कर खाना बदला था। शायद किसी और शुरुआत में खाना नहीं बदला होगा।” दोनों इस जवाब से संतुष्ट नहीं थे। पर मशीन बंद करना भी आसान नहीं लग रहा था।
विक्रम ने वही नोट भेज दिया। छल्ले में नीली रोशनी हुई और टिफिन गायब हो गया। मेज खाली होते ही फोन पर खबर आई: कैंटीन की पानी की टंकी में गंदगी मिली है। उसने खबर इरा को दिखाई।
अब वे बड़े नोट भेजना चाहते थे। कौन सी बस खराब होगी, किस दिन बारिश होगी, किस प्रयोग में गलती होगी। इरा ने पहले नियम बनाया। सिर्फ लैब में हुई घटनाओं का रिकॉर्ड भेजेंगे। किसी अंदाजे को पक्की बात नहीं लिखेंगे।
पहले हफ्ते में दो फाइलें बचीं। दूसरे हफ्ते उन्होंने एक महँगा सेंसर टूटने से रोक लिया। तीसरे हफ्ते नोट आया: शाम छह बजे घर जाना। इरा को मत रोकना। कोई वजह नहीं लिखी थी।
विक्रम को गुस्सा आया। यह उनका तय नियम तोड़ता था। उसने इरा से कुछ नहीं कहा। छह बजे वह काम समेटने लगी तो उसने नई रीडिंग देखने को कहा। वह बोली, “कल देख लेंगे। आज पापा का जन्मदिन है।”
विक्रम ने स्क्रीन बंद कर दी। इरा चली गई। अगले दिन उसने बताया कि पापा अचानक अस्पताल गए थे। अब ठीक थे। “अच्छा हुआ घर पर थी,” उसने कहा। विक्रम ने भविष्य वाला नोट मेज पर रख दिया।
इरा ने पूछा, “तुम कल क्या करते?” उसने सच कहा। “शायद रोक लेता।” दोनों कुछ देर चुप रहे। फिर उन्होंने नियम में एक लाइन जोड़ी: किसी नोट की वजह नहीं समझ आए तो पूछो। किसी की जगह फैसला मत करो।
उस शाम विक्रम ने नोट वापस भेजा। इस बार पीछे वजह भी लिखी। फिर मशीन के पास रखा दूसरा टिफिन खोला। इरा की माँ ने भेजा था। चार रोटियाँ थीं। एक छोटा नोट भी था: प्रयोग बाद में। पहले दोनों खाना खा लो।
कहानी के पीछे का खयाल
भविष्य से आने वाली पहली चीज कोई बड़ी चेतावनी नहीं, घर का खाना है। उसी छोटे प्रयोग से सवाल निकलता है कि किसी और के लिए फैसला करने से पहले क्या पूछना चाहिए।
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