हिंदी कहानी — मौलिक काल्पनिक कहानी
बिना तालियों वाला कमरा
यह scroll के हिसाब से अंदाजा है, पढ़े हुए शब्दों की गिनती नहीं।

लोगों के लिए मनचाहे सपने बनाने वाले कबीर ने ग्राहक की माँग तीन बार पढ़ी।
एक साधारण कमरा। एक हारमोनियम। कोई दर्शक नहीं।
उन्होंने स्क्रीन पर पहाड़ जोड़े।
“नहीं,” ग्राहक ने कहा।
झील जोड़ी।
“वह भी नहीं।”
“कम-से-कम खिड़की से समुद्र?”
“खिड़की सड़क की तरफ हो। नीचे कोई सब्ज़ी वाला आवाज़ लगा सकता है।”
ग्राहक प्रसिद्ध गायिका वंदना सेन थीं। कबीर ने उनके लिए चमकता मंच, फूलों की वर्षा और दस हज़ार दर्शकों की तालियाँ तैयार कर रखी थीं। अब उन सबको हटाने के अलग पैसे भी नहीं मिलने थे।
उन्होंने एक कमरा बनाया। दीवार पर घड़ी लगाई। हारमोनियम रखा।
“बहुत साफ़ है,” वंदना ने कहा। “कोने में थोड़ा सामान रहने दीजिए।”
कबीर ने पुराने अख़बार रख दिए।
“अब?”
“ताली बजाने वाला कार्यक्रम पूरी तरह बंद है?”
“जी। चाहें तो हर सही सुर पर छोटी-सी रोशनी जला दें?”
“नहीं।”
टेस्ट शुरू हुआ।
वंदना ने हारमोनियम खोला। पहला सुर लगाया, फिर दूसरा। तीसरे पर उनकी आवाज़ फिसल गई।
कबीर ने सुधार का बटन दबाने को हाथ बढ़ाया।
“रुकिए।”
वह रुके।
वंदना ने वही हिस्सा दोहराया। फिर गलत गाया। इस बार हँस पड़ीं।
बाहर सब्ज़ी वाले ने टमाटर का भाव पुकारा।
“यह ठीक है,” उन्होंने कहा।
कबीर ने टेस्ट बंद किया। रिपोर्ट में लिखना था कि ग्राहक को इस सपने से क्या मिला।
“आपको क्या मिला?” उन्होंने पूछा। “आराम? प्रेरणा? आत्मविश्वास?”
वंदना कुछ देर सोचती रहीं।
“रियाज़।”
“वह तो आप जागते हुए भी करती होंगी।”
“जागते हुए अगला कार्यक्रम सामने बैठा रहता है।”
आख़िरी भुगतान से पहले उन्होंने केवल एक बदलाव माँगा।
“दरवाज़े पर कुंडी लगा दीजिए।”
कबीर ने ज़रूरत पड़ने पर मदद बुलाने के लिए बाहर एक छोटी घंटी रखी।
वंदना ने उसे भी हटवा दिया।
कहानी के पीछे का खयाल
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