हिंदी कहानी — मौलिक काल्पनिक कहानी
दूसरी तस्वीर
यह scroll के हिसाब से अंदाजा है, पढ़े हुए शब्दों की गिनती नहीं।

फोटोग्राफर ने तस्वीर घुमाकर दिखाई तो देवकी ने चश्मा ऊपर कर लिया।
“ये कौन है?”
“आप ही हैं, आंटी। थोड़ा साफ़ किया है।”
तस्वीर में उनके बाल काले थे। आँखों के नीचे की रेखाएँ गायब थीं और ठुड्डी इतनी छोटी हो गई थी कि चेहरा किसी दूर की रिश्तेदार जैसा लग रहा था।
“मेरे बेटे ने भेजा है तुम्हें?” उन्होंने पूछा।
लड़का हँस पड़ा। “सबको ऐसी ही पसंद आती है।”
“मुझे नहीं आई।”
उन्होंने अपने सफ़ेद बालों पर हाथ फेरा। सुबह इन्हें ठीक करने में बीस मिनट लगे थे। फोटोग्राफर ने दो मिनट में पूरी मेहनत मिटा दी थी।
“पासपोर्ट के लिए है?”
“शादी के लिए।”
लड़के का हाथ माउस पर रुक गया।
देवकी ने उसकी तरफ़ देखा। “अब उम्र भी पूछोगे?”
“नहीं, नहीं।”
“बासठ। पूछने का काम बचा दिया।”
उन्होंने पर्स से फोन निकाला। सहेली पूर्णिमा ने तीन बार संदेश भेजा था: फोटो अच्छी खिंचवाना। चेहरा साफ़ दिखे। पिछले साल वाले भंडारे की मत भेज देना।
देवकी ने स्टूडियो आते समय बेटे को बताया था। वह पहले चुप रहा, फिर बोला, “फोटो मुझे दिखा देना।”
“दिखा दूँगी। चुनूँगी मैं।”
अब फोन बज रहा था।
“हो गई?” बेटे ने पूछा।
“एक और खिंचवा रही हूँ।”
“साड़ी ठीक पहनी है न?”
उन्होंने अपनी हरी सूती साड़ी की तरफ़ देखा। किनारे पर हल्का-सा मोड़ था।
“हाँ। रोज़ पहनती हूँ, अभ्यास है।”
फोन रखकर उन्होंने फोटोग्राफर से पहली तस्वीर हटाने को कहा।
“मूल वाली रख दूँ?”
“वही चाहिए। और ये चश्मा भी रहने दो।”
“काँच में लाइट आएगी।”
उसने लाइट खिसकाई। देवकी ने कुर्सी पर जगह बदली। दीवार पर लगे नमूनों में हर दूल्हा एक ही कोण पर मुस्करा रहा था।
“हाथ गोद में रखिए।”
“ऐसे?”
“थोड़ा मुस्कराइए।”
देवकी मुस्कराईं। फिर खुद ही हँस पड़ीं।
“मेरे पति कहते थे, फोटो खिंचवाते समय तुम किसी की शिकायत सुनती हुई लगती हो।”
फोटोग्राफर ने उसी क्षण बटन दबा दिया।
इस तस्वीर में उनकी एक आँख ज़रा छोटी दिख रही थी। चश्मा हल्का टेढ़ा था। साड़ी की सिलवट भी मौजूद थी।
उन्होंने कहा, “यही।”
शाम को पूर्णिमा ने तस्वीर आगे भेज दी। अगले दिन एक व्यक्ति का संदेश आया। नाम था अनिल। साथ में पार्क की तस्वीर थी, जिसमें उनके पीछे कूड़ेदान दिखाई दे रहा था।
मेरी बेटी कह रही है दूसरी भेजूँ। अभी यही है।
देवकी ने तस्वीर बड़ी करके देखी। आदमी की कमीज़ की जेब में दो पेन थे।
उन्होंने लिखा, कूड़ेदान से मुझे कोई परेशानी नहीं। दोनों पेन चलते हैं?
थोड़ी देर बाद जवाब आया।
एक चलता है। दूसरा लोगों को उधार देने के लिए है।
देवकी ने फोन रख दिया। फिर उठाया।
चाय पर मिल सकते हैं। लेकिन खराब वाला पेन घर छोड़कर आइएगा।
कहानी के पीछे का खयाल
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