हिंदी कहानी — मौलिक काल्पनिक कहानी
तेरहवीं खिड़की
यह scroll के हिसाब से अंदाजा है, पढ़े हुए शब्दों की गिनती नहीं।

आख़िरी सवाल सुनते ही इमरान ने बज़र दबा दिया।
“इस नगर सभा भवन के मुख्य हॉल में कुल कितनी खिड़कियाँ हैं?”
“तेरह।”
मंच पर बैठी संचालिका ने उत्तर की पर्ची देखी।
“गलत। बारह।”
दूसरी टीम के कप्तान ने तुरंत बज़र दबाया।
“बारह।”
तालियाँ बजने लगीं। इमरान ने पीछे की दीवार की तरफ़ इशारा किया।
“एक बार गिन लें?”
सामने पहली मेज़ पर पुरस्कार रखा था: मिक्सर-ग्राइंडर का बड़ा डिब्बा। इमरान ने सुबह अपनी चटनी सिलबट्टे पर पीसी थी। वह सिद्धांत की लड़ाई लड़ रहा था, लेकिन सिर्फ़ सिद्धांत की नहीं।
संचालिका ने मुस्कुराकर कहा, “उत्तर नगर इतिहास की आधिकारिक पुस्तिका से लिया गया है।”
“सवाल किताब में कितनी हैं, यह नहीं था।”
तालियों की जगह अब कुर्सियाँ खिसकने की आवाज़ें आने लगीं।
प्रतियोगिता के संयोजक उठे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम पहले ही बीस मिनट पीछे चल रहा है।
“गिनने में एक मिनट लगेगा,” इमरान बोला।
संचालिका ने घड़ी देखी। फिर माइक उसकी ओर बढ़ाया।
इमरान ने बाईं दीवार से शुरू किया।
“एक, दो, तीन, चार।”
दाईं तरफ़ चार और थीं। पीछे तीन। मंच के दोनों ओर एक-एक।
“तेरह।”
संयोजक ने मंच के दाईं ओर की खिड़की देखी। उसके सामने स्वागत का बड़ा बोर्ड लगा था। सिर्फ़ ऊपरी मेहराब दिखाई दे रही थी।
“वह खिड़की नहीं है।”
इमरान मंच तक आया।
“तो क्या है?”
“पुराना दरवाज़ा होगा।”
दर्शकों में बैठे चौकीदार शंकर ने खाँसकर ध्यान खींचा।
“खिड़की ही है। कल मैंने खोली थी। पेंट की गंध निकल नहीं रही थी।”
उन्होंने बोर्ड हटाया और खिड़की खोल दी। बाहर से एक कुत्ता दिखाई दिया। वह भी कुछ क्षण हॉल को देखता रहा।
पीछे किसी ने गिनती फिर शुरू कर दी।
संचालिका ने दूसरी टीम के कप्तान से पूछा, “आपकी आपत्ति?”
उसने मिक्सर के डिब्बे को देखा। फिर खुली खिड़की को।
“सवाल रद्द करके नया पूछिए।”
इमरान कुछ कहने वाला था, फिर बैठ गया।
नया सवाल था कि पुराने घंटाघर की घड़ी पर कितने अंक लिखे हैं।
दोनों टीमों ने बज़र दबाने के बजाय संचालिका की तरफ़ देखा।
“तस्वीर है?” दूसरे कप्तान ने पूछा।
इस बार संचालिका सबसे पहले हँसीं।
दस मिनट बाद निर्णायक सवाल का सही जवाब दूसरी टीम ने दिया। मिक्सर उन्हीं को मिला।
बाहर निकलते समय कप्तान ने इमरान को रोका।
“आप कहाँ रहते हैं?”
“क्यों?”
“कल इसका उद्घाटन है। चटनी लेकर आइए।”
इमरान ने डिब्बे पर छपी तस्वीर देखी।
“चटनी नहीं। धनिया लाऊँगा।”
कहानी के पीछे का खयाल
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