हिंदी कहानी — मौलिक काल्पनिक कहानी
उद्घाटन से पहले
यह scroll के हिसाब से अंदाजा है, पढ़े हुए शब्दों की गिनती नहीं।

नल चालू करने की चाबी शबनम की जेब में थी और नल खोलने की इजाज़त उस आदमी के पास, जिसकी गाड़ी अभी शहर से निकली भी नहीं थी।
नए सार्वजनिक नल के सामने चालीस बाल्टियाँ लगी थीं। सबसे आगे रामकली का पीतल का घड़ा था, जिसका मुँह हमेशा थोड़ा टेढ़ा रहता था। उन्होंने सुबह पाँच बजे आकर नंबर लगाया था।
“फीता नौ बजे कटना था,” रामकली ने कहा।
शबनम ने घड़ी देखी। नौ बजकर सोलह मिनट।
उसके पिता बीस साल से गाँव की मोटर चलाते थे। अब घुटने जवाब दे गए थे। आज पहली बार उनकी जगह शबनम की ड्यूटी लगी थी। ठेकेदार ने नियुक्ति का कागज़ अभी दिया नहीं था, लेकिन रजिस्टर पर उसका नाम लिख दिया था।
“मुख्य अतिथि आएँगे, तभी पानी खुलेगा,” उसने सुबह साफ कहा था। “आज गड़बड़ की तो दूसरी लड़की रख लूँगा।”
अगले ही मिनट बिजलीघर से फोन आया।
“दस बजे मरम्मत शुरू होगी। उसके बाद शाम तक बिजली नहीं मिलेगी।”
शबनम ने मोटर का पैनल देखा। बिजली गई तो पानी भी बंद। इन सबका पानी भरते-भरते दस बज जाएँगे।
उसने ठेकेदार को फोन किया।
“गाड़ी आ रही है। पाँच मिनट।”
सुबह से वह यही जवाब तीन बार सुन चुकी थी।
पीछे खड़ी एक औरत ने अपनी खाली बाल्टी उठाई। उसे काम पर पहुँचना था। दूसरी ने बताया कि घर में आटा गुँधा रखा है, पीने को पानी नहीं। रामकली चुप थीं। उन्होंने बस घड़े का मुँह कपड़े से ढक दिया।
शबनम ने पिता को फोन लगाया।
“खोल दूँ?”
“नौकरी का कागज़ मिला?”
“नहीं।”
दूसरी तरफ कुछ देर खाँसी सुनाई दी।
“फिर फैसला तुझे करना पड़ेगा,” पिता ने कहा।
शबनम ने फोन रखा। रजिस्टर में समय लिखा: नौ बजकर इकतीस मिनट। उसके सामने लिखा: बिजली बंद होने की सूचना पर आपूर्ति शुरू। नीचे दस्तखत किए।
चाबी घूमी तो पाइप पहले खाँसा। फिर पानी निकला। रामकली ने कपड़ा हटाकर घड़ा आगे कर दिया।
ठेकेदार नौ बजकर पचास मिनट पर पहुँचा।
“तुमने उद्घाटन कर दिया?”
“पानी खोला है,” शबनम ने कहा। “फीता लगा हुआ है।”
उसने कैंची माँगी। रामकली ने भरे घड़े के पीछे से अपनी सिलाई वाली छोटी कैंची निकाल दी।
अतिथि आए तो आखिरी बाल्टी भर रही थी। तस्वीर के लिए शबनम को हटने को कहा गया। वह हट गई, लेकिन रजिस्टर ठेकेदार के सामने रख दिया।
“आज की ड्यूटी पर आपके दस्तखत बाकी हैं।”
तब तक कैमरे वाला उन्हें देखने लगा था। ठेकेदार ने दस्तखत कर दिए।
शाम को शबनम रजिस्टर घर लाई। पिता ने पहले दस्तखत देखे, फिर उसकी लिखी वजह।
“नौकरी अभी पक्की नहीं हुई,” उन्होंने कहा।
“मालूम है।”
उन्होंने चाबी वापस उसकी हथेली पर रख दी।
“सुबह पाँच बजे रामकली फिर आ जाएगी।”
कहानी के पीछे का खयाल
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